अभी न पर्दा गिराओ, ठहरो,--------

अभी न पर्दा गिराओ, ठहरो, कि दास्ताँ आगे और भी है
अभी न पर्दा गिराओ, ठहरो!
अभी तो टूटी है कच्ची मिट्टी, अभी तो बस जिस्म ही गिरे हैं
अभी तो किरदार ही बुझे हैं।
अभी सुलगते हैं रूह के ग़म, अभी धड़कते हैं दर्द दिल के
अभी तो एहसास जी रहा है
यह लौ बचा लो जो थक के किरदार की हथेली से गिर पड़ी है
यह लौ बचा लो यहीं से उठेगी जुस्तजू फिर बगूला बनकर
यहीं से उठेगा कोई किरदार फिर इसी रोशनी को लेकर
कहीं तो अंजाम-ओ-जुस्तजू के सिरे मिलेंगे
अभी न पर्दा गिराओ, ठहरो!















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fight for Eunuchs

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third gender equality

किन्नरों के लिए खुला पहला स्कूल एवं पुनर्वास केंद्र

7:14 AM / Posted by huda /


Feb 20, 11:22 am
बरेली। समाज के सबसे तिरस्कृत तबके यानी किन्नरों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें सम्मानपूर्ण जीवन जीने का अधिकार दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के तहत उत्तर प्रदेश के बरेली में देश का सम्भवत: अपनी तरह का पहला 'किन्नर स्कूल' खोला गया है।
बरेली की गैर सरकारी संस्था शेख फरजंद अली एजुकेशनल एण्ड सोशल फाउंडेशन आफ इंडिया [सिस्फा-इस्फी] ने किन्नरों के लिए 'आस' नाम से यह स्कूल सह पुनर्वास केन्द्र खोला है। इसे देश में अपनी तरह का पहला तरबियती इदारा माना जा रहा है।
देश में जारी जनगणना में किन्नरों के लिए अलग श्रेणी आवंटित करवाने के लिए सफल मुहिम चला चुकी संस्था 'सिस्फा-इस्फी' के सचिव और शहर के एक मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डाक्टर सैयद एहतेशाम हुदा ने कहा कि किन्नर भी आम इंसान हैं और उन्हें भी सामान्य लोगों की तरह जिंदगी जीने का हक है।
उन्होंने कहा कि देश में किन्नरों को हिक़ारत भरी नज़रों से देखा जाता है और इसी तिरस्कार के चलते यह तबका समाज की मुख्यधारा से कोसों दूर है। लोगों की बलाएं लेने वाले किन्नरों का पीछा कर रही बलाओं को खत्म करने की फिक्र भी जरूरी है।
हुदा ने बताया कि समाज में हाशिए पर खड़े किन्नरों को इस बहुआयामी स्कूल में सामान्य शिक्षा के अलावा जरी-जरदोजी, सिलाई, कढ़ाई, नर्सिग, कम्प्यूटर, ब्यूटीशियन, रिसेप्शनिस्ट तथा कुकिंग समेत विभिन्न रोजगारपरक कार्याें का प्रशिक्षण देने के साथ-साथ व्यक्तित्व निर्माण के गुण तथा संवैधानिक अधिकारों एवं कर्तव्यों के बारे में जानकारी देकर जागरूकता पैदा की जाएगी।
हुदा ने बताया कि किन्नरों के लिए स्कूल एवं पुनर्वास केन्द्र फिलहाल सप्ताह में एक दिन खोला जाता है लेकिन जल्द ही इसमें रोजाना कक्षाएं चलाई जाएंगी।
उन्होंने बताया कि स्कूल में शिक्षण-प्रशिक्षण का तौर-तरीका भी नई परिकल्पना पर आधारित है। इस स्कूल में स्थाई अध्यापक नहीं होंगे। इसमें वह खुद आकर किन्नरों को पढ़ाएंगे।
इसके अलावा रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी जरूरतों के बारे में किन्नरों की जिज्ञासाओं और सवालों के जवाब देने के लिए शैक्षिक, सामाजिक, न्यायिक, आर्थिक और वैज्ञानिक क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों को अतिथि अध्यापक के तौर पर बुलाया जाएगा।
आल इंडिया किन्नर एसोसिएशन की अध्यक्ष सोनिया हाजी ने किन्नरों के लिए स्कूल खोले जाने का स्वागत करते हुए इसे देश में किन्नरों की हालत में सुधार की दिशा में उठाया गया अत्यंत महत्वपूर्ण कदम बताया।
उन्होंने कहा कि इसके जरिए किन्नर अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक होकर मुख्यधारा में शामिल होने के वास्ते मानसिक रूप से तैयार हो जाएंगे।
किन्नरों के कल्याण के प्रति हुदा की मुहिम से जुड़े देश के प्रख्यात इतिहासकार तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त शिक्षक प्रोफेसर यू. पी. अरोड़ा ने बताया कि विश्व इतिहास में किन्नरों का गौरवशाली इतिहास रहा है और एक वक्त तो मिस्र की अदालतें किन्नरों के जिम्मे थीं।
उन्होंने कहा कि 'सिस्फा-इस्फी' द्वारा स्थापित किया गया किन्नर स्कूल सह पुनर्वास केन्द्र देश में अपनी तरह का पहला केन्द्र है।
गौरतलब है कि सिस्फा-इस्फी द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय और राष्ट्रपति भवन को पत्र लिखकर गुजारिश किए जाने के बाद सरकार ने जनगणना में किन्नरों के लिए अलग श्रेणी आवंटित करने पर गौर के लिए पिछले साल एक तकनीकी सलाहकार समिति गठित की थी, जिसकी सिफारिश पर सरकार ने किन्नरों के लिए महिला और पुरुष वर्ग के अतिरिक्त किन्नरों के लिए 'कोड 3' की व्यवस्था की थी।
बकौल हुदा, सरकार ने सूचना का अधिकार कानून के तहत अर्जी दिए जाने पर उन्हें यह जानकारी दी थी।
हुदा ने कहा कि देश में राष्ट्रीय महिला आयोग की तर्ज पर किन्नर आयोग का भी गठन होना चाहिए और इस सिलसिले में वह जल्द ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तथा संप्रग अध्यक्ष सोनिया गाधी से मुलाकात कर उनसे यह माग करेंगे।
उन्होंने कहा कि इसके लिए दिल्ली में वरिष्ठ अधिवक्ताओं से राय ली जा रही है और जरूरत पड़ने पच् उच्चतम न्यायालय में जनहित याचिका भी दायर की जाएगी।

1 comments:

Comment by मधेपुरा टाइम्स on April 28, 2011 at 8:05 AM

आपका प्रयास अत्यंत ही सराहनीय है.आशा है ये उपेक्षित वर्ग समाज की मुख्यधारा से भलीभांति जुड़ सकें.

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